भारत में दृश्य खण्डग्रास चंद्रग्रहण - सोमवार - 7/8 अगस्त 2017

                           
                                                           सोमवार - 7/8 अगस्त 2017

👉 खंडग्रास चंद्रग्रहण -  श्रावण शुक्ल पूर्णिमा सोमवार 7 व 8 अगस्त 2017 कि मध्य रात्रि को समस्त भारत में खंडग्रास चंद्रग्रहण दक्षिणी और पूर्वी एशिया के अधिकतर देशों यूरोप,अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया (पाकिस्तान,अफ़ग़ानिस्तान, ईरान,इराक,सऊदी अरब,इथोपिया,केन्या,तंजानिया,रूस,चीन,मंगोलिया,म्यांमार,मलेशिया,जापान,थाईलैंड,सिंगापुर,सोमालिया,फ़िलीपीन्स,हांगकांग) आदि में देखा जा सकेगा |

👉 इस ग्रहण का स्पर्श - मोक्ष आदि का समय भारतीय मानक समय इस प्रकार है -

     
               ग्रहण प्रारंभ - रात्रि 10-53 बजे
               ग्रहण मध्य - रात्रि 11-51 बजे
               ग्रहण मोक्ष ( समाप्त )-  मध्य रात्रि के बाद 12-48 बजे |

👉 ग्रहण का सूतक : - ग्रहण का सूतक 07 अगस्त , 2017 को दोपहर बाद 01-53 से प्रारंभ होगा | सूतक में बाल,वृद्ध,रोगी और आसक्त जनों को छोड़कर अन्य जनों को भोजन,शयन,मूर्ति स्पर्श,मैथुन,नाख़ून काटना,तेल लगाना आदि कार्य नही करने चाहिए |
रोगी,गर्भवती स्त्रियों को यथा समय भोजन व औषधादि लेने में दोष नही हैं |

👉 ग्रहण काल  व ग्रहण के बाद करने योग्य कार्य : - ग्रहण काल में स्नान,दान,ध्यान,जप,पाठ,मंत्र-तंत्र सिद्धि,तीर्थ स्थान में स्नान व हवनादि शुभ कर्म करना हितकर है |ग्रहण कि समाप्ति के बाद सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्प पूर्वक पात्र ब्राह्मणजनों को दानादि करना चाहिए| गर्भवती महिलाओं को सूतक में चाक़ू-चुरी, ब्लेड से फल, हरी सब्जियां और नाख़ून आदि नही काटने चाहिए| गर्भवती स्त्रियों को अपने साडी के पल्लू को गेरू के घोल में रंग लेना चाहिए जिससे गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण का कोई दुष्प्रभाव नही होगा |


👉 चूड़ामणि चंद्रग्रहण :- यह चंद्रग्रहण सोमवार को घटित होने से चूडामणि चंद्रग्रहण कहा जायेगा | शास्त्रों में इस ग्रहण का स्नान,जाप, दान, पूजा,हवनादि का बहुत महत्व मन गया है | " तत्फलं कोटिगुनितं घेय चूड़ामणौ ग्रहे || "

👉 ग्रहण का राशिगत प्रभाव : - यह खण्डग्रास चंद्रग्रहण श्रवण  नक्षत्र तथा मकर राशि में होने से इस राशि व नक्षत्र में उत्पन्न जात को कुछ विशेष कष्टप्रद रहेगा | इनके अतिरिक्त जलीय जीवों, राजनेताओं, प्रतिष्ठित व्यक्तियों के परिवार जनों व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, मंत्रशास्त्रियों, औषध निर्माताओं,आयुध-शस्त्र, जीवियों , सैनिको, वृद्ध जनों को नानाविध कष्टों का सामना करना पड़ता है| अतः इस राशि- नक्षत्र वाले जातकों को चन्द्र, राहू व राशि स्वामी शनि के यथाआवश्यक जप,दान आदि करना हितकर रहेगा |

                                 👉    अन्य राशि वाले जातकों के लिए ग्रहण का फल : -

जन्म/नाम राशि        फल 

         
मेष          -       सुख व शुभद
वृषभ          -      मान - सम्मान में गिरावट
मिथुन        -      शारीरिक कष्ट
कर्क            -      दाम्पत्य कष्ट
सिंह            -       कार्यसिद्धि
कन्या         -       चिंता/ तनाव
तुला           -        रोग भय
वृश्चिक      -        धनलाभ
धनु            -        हानि
मकर         -         चोट भय
कुंभ           -         धनहानि
मीन           -         लाभवृद्धि


                                                                 ग्रहण का अन्य फल : - 

1. मासफल = श्रवण मास में ग्रहण होने से कश्मीर,मेघालय, नागालैंड, मध्य प्रदेश, भूटान, सिक्किम, पाकिस्तान, बलूचिस्तान, काबुल-कंधार में प्राकर्तिक प्रकोप, आपदाए, कहीं उग्रवाद अदि से भरी हानि हो सकती है |

2. ग्रह द्रष्टि फल = मकर राशि के चन्द्रमा पर सूर्य, नीच के मंगल व शनि कि द्रष्टिवशात्, राजनैतिक दलों, राजनीतिज्ञों में परस्पर विद्वेष, संघर्षमय वातावरण कि स्थिति, अनैतिक आचरण, अग्निकांड, धार्मिक उन्माद् तथा सीमाप्रदेश व क्षेत्रों में तनाव कि स्थिति में वृधि होगी |



         लेखक -          ज्योतिर्विद्ः घनश्यामलाल स्वर्णकार
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