कुंडली में वाहन, मकान व सम्पति योग – भाग -1
कुंडली में चतुर्थ भाव से वाहन -कार, मोटरगाड़ी आदि तथा मकान – जमीन व भू-संपत्ति के बारे में विचार किया जाता है | कुंडली के चतुर्थ भाव को सुख का स्थान माना जाता है और शुक्र को वाहन सुख का कारक | किसी व्यक्ति को वाहन सुख मिलेगा या नहीं यह जानने के लिए शुक्र और चौथे भाव के स्वामी ग्रह की स्थिति का अध्ययन किया जाता है | भाग्य एवं भाग्येश भी वाहन सुख के लिए महत्वपूर्ण है | यदि चतुर्थ भाव शुभ राशि में शुभ ग्रह या अपने स्वामी से युत या दृष्ट हो, किसी पाप ग्रह से युत या दृष्ट ना हो, इसी प्रकार चतुर्थेश भी शुभ प्रभाव में शुभ ग्रह से युत दुष्ट हो, किसी पाप प्रभाव में ना हो तो चतुर्थ भाव संबंधी शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है
यह प्रथम साधारण नियम है| अब आगे विचार करने के लिए इसे हम दो भागों में विभक्त करते हैं | प्रथम भाग – वाहन संबंधी, द्वितीय भाग -संपत्ति |
ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि उपरोक्त सभी सुख के साधन चतुर्थ भाव से संबंधित है लेकिन दोनों भावों के कारक ग्रह अलग अलग है जैसे वाहन का कारक ग्रह शुक्र है उसी प्रकार मकान भूमि इत्यादि का कारक ग्रह मंगल है |
वाहन सुख से जुड़े कुंडली के ग्रह राशि और भाव
- वाहन का कारक ग्रह शुक्र है, कुंडली में चतुर्थ भाव चतुर्थेश एवं शुक्र की स्थिति अच्छी होने पर वाहन संबंधी शुभ फल की प्राप्ति होती है| चतुर्थ भाव के कारक ग्रह चंद्र एवं बुध हैं| यदि इनकी स्थिति भी कुंडली में अच्छी हो तो सोने पर सुहागा अर्थात उत्तम शुभ फल की प्राप्ति होती है एवं जातक को काफी ऊंचे दर्जे का वाहन प्राप्त होता है |
वाहन प्राप्ति संबंधित सूत्र इस प्रकार हैं : –
- कुंडली में यदि चतुर्थ भाव का स्वामी लग्न में हो तथा लग्नेश चतुर्थ भाव में हो तो इन दोनों के बीच राशि परिवर्तन योग बनेगा इस योग के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को मनचाहे वाहन का सुख अवश्य मिलता है |
- लग्नेश, चतुर्थेश तथा नवमेश के परस्पर केंद्र में रहने से वाहन सुख मिलता है |
- चतुर्थेश पंचम भाव में तथा पंचमेश चतुर्थ भाव में हो तो उत्तम वाहन प्राप्ति योग होता है|
- चतुर्थेश एकादश भाव में तथा लाभेश चतुर्थ भाव में हो |
- शुक्र से सप्तम भाव में चंद्रमा होने से भी वाहन से सुख देखा गया है |
- चतुर्थेश केंद्र में हो और केंद्र का स्वामी लग्न में हो तो वाहन योग होता है |
- चतुर्थेश चतुर्थ भाव में तथा लाभेश दशम भाव में हो तो भी वाहन से सुख प्राप्त होता है |
- नवमेश दशमेश लाभेश तीनों चतुर्थ भाव में हो तो वाहन योग |
- यदि चतुर्थेश 6, 8, 12 भाव में बैठा हो या अस्त या शत्रु ग्रह या नीच राशिगत हो तो जातक के वाहन में स्थिरता नहीं होती, वाहन बिगड़ता रहता है
- किसी जन्म कुंडली में अगर शुक्र का संबंध ( राशि, स्थान ,युति ) चतुर्थ भाव से नही बन रहा हो, लेकिन कुंडली में शुक्र अगर उच्च का होकर केंद्र या त्रिकोण में बेठा हो तो भी उत्तम वाहन प्राप्ति का सूचक माना गया है |
लेखक – ज्योतिर्विद्ः घनश्यामलाल स्वर्णकार|
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