सोमवती अमावस्या को कैसे करें पूजन एवं दान ?
सोमवार युक्त अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं | गणित की प्रायिकता सिद्धांत के अनुसार वर्ष में एक या दो बार ही सोमवार के दिन अमावस्या हो सकती है | कभी-कभी किसी वर्ष में 3 भी हो जाया करती है | परंतु समय चक्र के अनुसार अमावस्या को सोमवार के दिन होना बिल्कुल अनिश्चित है |
स्कंद पुराण के अनुसार सोमवार और अमावस्या का योग कभी-कभी होता है | विशेषकर सोमेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से कोटि यज्ञों के फल के बराबर बताया गया है |
सोमवती अमावस्या को तीर्थ-स्नान, जप, पाठ एवं ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, दक्षिणादि सहित दान करना विशेष पुण्यप्रद माना गया है | पुनश्च इस बार 12 अप्रैल 2021 को हरिद्वार कुंभ का भी विशेष उत्सव एवं अवसर है | कुंभ के दौरान सोमवती अमावस्या का दिन बहुत ही पवित्र माना गया है | इस दिन नागा साधुओं द्वारा शाही स्नान किया जाता है, सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का एक विशेष महत्व भी है | सोमवती अमावस्या के दिन महिलाएं तुलसी माता की 108 परिक्रमा लगाते हुए कोई भी वस्तु का दान करने का संकल्प भी लेती है |
सोमवती अमावस्या के योग में चंद्रमा, अश्विनी, कृतिका, पुनर्वसु, पुष्य, रोहिणी, विशाखा, मघा, उ.फा., मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण या उत्तराभाद्रपद इनमें से किसी एक नक्षत्र में संचरित हो तो ऐसे योग में तैयार की गई जड़ी बूटियों या औषधियों से अनेक प्रकार के एवं शारीरिक एवं मानसिक रोगों में लाभकारी सिद्ध होती है | इसके अतिरिक्त सोमवती अमावस्या के विशिष्ट योग में पितृदोष की शांति, धन-संपत्ति संबंधित बाधाएं एवं परेशानियां, विवाह विलंब, संतान बाधा,धार्मिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में आत्म शुद्धि, स्नान, दान, जपादि की दृष्टि से सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है | इस दिन व्रत करने, अपने इष्टदेव , भगवान विष्णु व शिव का पूजन, चंद्र तथा पीपल को गंगाजल से पूजन करके उपरोक्तानुसार 108 बार प्रदक्षिणा करके ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा देकर वस्त्र आदि फलों का दान करने का विशेष महत्व है ||
ज्योतिर्विद् : घनश्यामलाल स्वर्णकार
संस्थापक ,प्रबंध निदेशक एवं एवं सचिव
श्री रामानुज ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र जयपुर ( राजस्थान )
9414047008 , 7023847008
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