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Showing posts from September, 2017

कब होगा कन्या का विवाह

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कब होगा कन्या का विवाह   जब कन्या विवाह योग्य आयु प्राप्त कर लेती है, तो माता - पिता को उसके विवाह कि स्वभाविक चिंता सताने लगती है | उनके मन में अपनी कन्या के लिए अनेक जिज्ञासाये उठती है, जैसे - कन्या का विवाह कब होगा, पति कैसा मिलेगा, विवाह किस दिशा में होगा, ससुराल पक्ष कैसा होगा, विवाह उपरांत दाम्पत्य जीवन कैसा रहेगा, पति का व्यवसाय कैसा होगा, पति नोकरी वाला होगा या व्यवसायी, यदि नोकरी होगी तो उच्चस्तरीय होगी या सामान्य स्तर की, संतान सुख कैसा रहेगा आदि-आदि | यदि आप विश्वास करे तो आपकी इस जिज्ञासाओ के समाधान में ज्योतिश विज्ञान आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है| कन्या कि जन्म कालीन ग्रह स्थितियों के आधार पर उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर विवाह से पूर्व आपको मिल सकते है| तो देखे, कब होगा कन्या का विवाह - इस प्रश्न के निर्णय के लिए सप्तम भाव व सप्तमेश कि प्रक्रति का ध्यान पूर्वक गूढता से विचार करना चाहिए, इसके साथ ही क्षेत्रीयता, लोक व वंश परम्परा तथा जाती व वर्ग आदि का भी ध्यान रखना चाहिए| साधक - बाधक योगो, दशांतर्दशा तथा गोचर ग्रहों को दृष्टिगत रखना चाहिए| य...

बृहस्पति ग्रह संबंधित विचार एवं अनुभव

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बृ हस्पति  ग्रह संबंधित विचार एवं अनुभव   देवगुरु बृहस्पति को नौ ग्रहो में सबसे श्रेष्ठ मन गया है यह अन्य सभी ग्रहो से आकार में बड़ा है इसका व्यास 1578752 कि-मी- बताया गया है संभवतया इसके विस्तृत आकार के कारण ही इसका नाम गुरु रखा गया सूर्य से इसकी दूरी का अनुमान 773120000 कि-मी- बतायी गयी है यह पृथ्वी से लगभग 587200]000 कि-मी- की दूरी तक आ जाता है इसकी गति 12 कि-मी- प्रति सैकिण्ड है इस गति से लगभग 4332 दिन अथवा 12 वर्षो में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है इसके 12 उपग्रह बताये जाते है कुछ विद्वान इसके 4 उपग्रह बताते है जो इसके चारो ओर चक्कर लगते  है    बृहस्पति के अनेक पर्याय नाम है %& गुरु] आर्य & गीष्मपति & धिषण & आंगिरस] चित्र & शिखंडिज] वचसांपती] वाक्पति] जीव इज्यदेवेज्य] सुराधिप] देवमन्त्री] विवुधपतिगुरु]  बृहस्पति] कुलिसकरनुत & गीवर्नाणवंद्य & प्रशांत] त्रिविवेश वंद्य] सुरि] सुरेज्य] ग्रहराजयौ] प्रचक्षस] मंत्री वाचस्पति] सुराचार्य] अंगिरा] ईडय] वासवगुरु & प्राग्भव &प्राकफाल्गुन] अमरगुरु आदी  ब...

| शारदीय नवरात्रा पर घट् स्थापना मुहूर्त||

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                                                                                   ||  शारदीय नवरात्रा पर घट् स्थापना मुहूर्त    || शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार 21सितम्बर, 2017 से शारदीय नवरात्रा प्रारम्भ हो रहें हैं। अत: इस दिन शास्त्रानुसार घट् स्थापना  का उत्तम समय द्विस्वभाव लग्न युक्त प्रात:काल में ही शुभ व श्रेष्ठ  बताया गया है ।जो 21सितम्बर को प्रात: 6-18 से प्रात: 7-49 बजे तक सर्वश्रेष्ठ है।जिसमें कन्या का द्विस्वभाव लग्न और शुभ का श्रेष्ठ चौघडिया भी विद्यमान है ।इसके अतिरिक्त दोपहर 11-56 से दोपहर 12-44 तक अभिजित नामक मुहूर्त में भी यथा आवश्यक घट्स्थापना की जा सकती है ।                      ज्योतिर्विद्: घनश्याम लाल स्वर्णकार,जयपुर (राजस्थान )।

केमद्रुम योग - क्या आपकी कुंडली में है केमद्रुम योग ? जानें ये उपाय

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केमद्रुम योग - क्या आपकी कुंडली में है केमद्रुम योग ? जानें ये उपाय आपने कुंडली के ऐसे योगों के बारे में जरुर सुना होगा जिनमें व्यक्ति राजा तक बन जाता है। निर्धन व्यक्ति भी धनवान बन जाता है। ऐसे योग भी जरुर देखें होंगें जिनमें रातों रात जातक प्रसिद्धि पा जाते हैं। मंझे हुए कलाकार बन जाते हैं। या फिर एक सरकारी नौकरी पाकर एक सुरक्षित जीवन व्यतीत करते हैं लेकिन कुछ ऐसे योग भी हैं जिन्हें योग की बजाय दोष कहना उचित होता है। ऐसा ही एक योग है केमद्रुम योग। केमद्रुम योग वाले जातक जीवन में निर्धनता के लिये अभिशप्त होते हैं। कुछ जातकों की कुंडली में तो यह इतना प्रबल हो सकता है कि उनकी मृत्यु के बाद अत्येंष्टि तक में भारी दिक्कतें आती हैं। आइये जानते हैं क्या है यह केमद्रुम योग और किन परिस्थितियों में बनता है यह अशुभ फल दायी और कब इसमें मिल सकते हैं शुभ फल? कब बनता है केमद्रुम योग जब जातक की कुंडली में चंद्रमा अकेला हो और उसके अगल-बगल अन्य भावों में कोई ग्रह न हो तो इस स्थिति में केमद्रुम योग बनता है। लेकिन इसी स्थिति में जब चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न ...

क्या आपकी कुंडली में है गजकेसरी योग?

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क्या आपकी कुंडली में है गजकेसरी योग? ज्योतिषशास्त्र में जातकों के भाग्योदय का कारण जातक की जन्मकुंडली में शुभाशुभ योगों का होना होता है। ऐसे बहुत सारे योग हैं जो किसी विशेष क्षेत्र में जातक को सफलता दिलाते हैं या फिर जातक के जीवन के किसी महत्वपूर्ण पहलू में कब क्या बदलाव होंगे या जातक कैसा जीवन व्यतीत करेगा इसकी संभावना जताते हैं। इन्हीं योगों में एक ऐसा योग भी होता है जो जातक की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता ही है साथ ही उसकी बुद्धि, क्षमता और शक्ति में भी वृद्धि करता है। उच्च पदस्थ अधिकारी से लेकर व्यापारी तक और नेता से लेकर अभिनेता तक बनने के योग बनाता है। इस योग को कहा जाता है गजकेसरी योग। अपने इस लेख में हम इसी की बात करेंगें। क्या है गजकेसरी योग ? गजकेसरी योग एक बहुत ही शुभ योग माना जाता है। यह प्रमुख धन योगों में से एक होता है जो गुरु और चंद्र के योग से बनता है। जातक की कुंडली के किसी भी भाव में गुरु व चंद्रमा की युति हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि उन पर न पड़ रही हो या कोई पाप ग्रह उनके साथ न हो तो यह योग बहुत शुभफलदायी माना जाता है। कैसे बनता है कुंडली में गज...