Posts

Image
 गणपति पूजन का श्रेष्ठ समय इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, मंगलवार, 19 सितम्बर, 2023 को मध्याह्न काल में होने से गणेश चतुर्थी इसी दिन मनाई जायेगी। इस दिन प्रथम पूज्य गणेश जी का‌ जन्मोत्सव घर -घर मनाये जाने की प्रथा है। शास्त्रों में गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय मध्याह्न काल ( वृशिचक लग्न सहित) श्रेष्ठ बताया गया है,जो मंगलवार 19 सितम्बर 2023 को पूर्वाह्न 11:08 से दोपहर 1:33 तक रहेगा। जिसमें दिन के 11:08 से दोपहर 1:01 तक वृशिचक लग्न और भी श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त श्रेष्ठ चौघडिए प्रातः 9:19 से  दोपहर 1:51 तक चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद 3:22 से सायं 4:53 तक शुभ के चौध दिए हैं। इनमें भी गणेश जी का पुजन किया जा सकता है।

Raksha Bandhan

Image

खण्डग्रास सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर, 2022 का राशियों पर प्रभाव

Image
  ग्रस्तास्त खण्डग्रास सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर,2022 ईस्वी। कार्तिक कृष्णा अमावस्या मंगलवार 25 अक्टूबर 2022 ईसवी को (भारत के सुदूरवर्ती पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश , पूर्वी आसाम के गुवाहाटी नगर से दाएं और तथा मेघालय राज्य के नल को छोड़कर ) ग्रस्तास्त खंडग्रास ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। पूर्वी भारत को छोड़कर समस्त भारत में यह ग्रस्तास्त रूप में देखा जाएगा। भारत मैं ग्रहण का मोक्ष होने से पूर्व ही सूर्यास्त हो जाएगा। यह सूर्य ग्रहण भूमंडल पर भारतीय मानक समयानुसार दोपहर बाद 2-29 से सायं 6-32 के मध्य होगा। जो यूरोप, उ • पूर्व अफ्रीका, उत्तरी हिंद महासागर, पश्चिम एशिया स्थित देश यथा भारत, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान,ईराक, फ्रांस, जर्मनी, इजरायल, स्वीडन, नार्वे आदि देशों में दिखाई देगा। पर भारत में सायं 4-15 से सायं 5-30 बजे के मध्य अलग-अलग समय पर दिखाई देना आरंभ करेगा। जो सूर्यास्त तक दिखाई देता रहेगा।   इस ग्रहण का सूतक 25 अक्टूबर 2022 के सूर्य उदय से पहले रात्रि 2:29 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। भारत में ग्रहण का सूतक सूर्य उदय पूर्व 4-15 से प्रारंभ होगा। सूतक काल म...

दीपावली व लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

Image
दीपावली महापर्व व श्री महालक्ष्मी का पूजन कार्तिक कृष्ण अमावस्या में प्रदोष काल एवं अर्द्धरात्रि व्यापिनी हो , तो विशेष रूप से शुभ होती है। लक्ष्मी पूजन, दीपदान आदि के लिए प्रदोष काल ही विशेष रुप से शुभ माना गया है इस वर्ष कार्तिक अमावस्या सोमवार 24 अक्टूबर 2022 ईस्वी को सायं 5 -28 के पश्चात प्रदोष , निशीथ वह महानिशीथ व्यापिनी होगी । अतः इसी दिन दीपावली मनाई जाकर लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। सायं दीपावली पर्व चित्रा नक्षत्र, विष्कुंभ योग, कन्या राशिस्थ चंद्रमा तथा अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या युक्त होने से बहुत ही शुभ, सुख-शान्ति व समृद्धि दायक है। दीपावली व लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त ( राजस्थान, जयपुर व निकटवर्ती क्षेत्रों के सूर्यास्त के समयानुसार) प्रदोष काल - 5-47 से रात्रि 8-21 बजे तक, वृष लग्न - रात्रि 7-03 से रात्रि 9-00 बजे तक, सिंह लग्न - अर्द्धरात्र्योत्तर1-33 से 3 - 49 तक , चौघड़िया मुहूर्त - चर का चौघड़िया सायं 5 - 47 से रात्रि 7 - 23 तक , लाभ का चौघड़िया - रात्रि 10 - 35 से रात्रि 12 - 11 तक तथा शुभ व अमृत पूर्वार्द्ध चौघड़िया अर्द्धरात्र्योत्तर 1 - 47 से अंतरात्रि    4 ...

शारदीय नवरात्र पर घट स्थापना मुहूर्त :-

Image
                        :- शारदीय नवरात्र पर घट स्थापना मुहूर्त :-  आश्विन शुक्ल प्रतिपदा सोमवार 26 सितंबर 2022 से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं,  घट स्थापना के लिए प्रातः काल का ही समय श्रेष्ठ बताया गया है | इस वर्ष आश्विन शुक्ल प्रतिपदा सोमवार को सूर्योदय प्रातः 6:11 बजे होगा और द्विस्वभाव कन्या लग्न प्रातः 7:51 तक है अतः प्रातः 6:11 से प्रातः 7:51 तक घट स्थापना कर नवरात्र प्रारंभ करने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होगा | इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:55 से दोपहर 12:42 बजे तक भी घट स्थापना की जा सकती है | चौघड़िया की दृष्टि से प्रातः 9:19 से प्रातः 10:49 तक शुभ के चौघड़िए में भी घट स्थापना कर सकते हैं ज्योतिर्विद् : घनश्यामलाल स्वर्णकार संस्थापक ,प्रबंध निदेशक एवं एवं सचिव श्री रामानुज ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र जयपुर ( राजस्थान ) 9414047008 , 7023847008

।। बसंत‌ नवरात्रा पर घट् स्थापना का मुहूर्त ।।

Image
 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार दिनांक 13 अप्रैल 2021 से बसंत नवरात्रा प्रारंभ हो रहें हैं । देवी पुराण व तिथि तत्व में नवरात्रा पर देवी का आह्वान व घट् स्थापना के लिए प्रातःकाल का ही समय श्रेष्ठ बताया गया है। इसमें द्विस्वभाव लग्न की विशेष महत्ता है । प्रात:काल का समय सूर्योदय से 10 घटि अर्थात 4 घंटे के समय को प्रातः काल कहा जायेगा । स्थान विशेष के अक्षांश और देशांतर के अनुसार सूर्योदय का समय भिन्न-भिन्न होगा । जयपुर (राज०) में 13 अप्रैल 2021 को सूर्योदय 6-09 बजे होगा । द्विस्वभाव मीन का लग्न प्रातः 6-12बजे तक ही है ।जो बहुत ही अल्प समय है। प्रातः काल का समय 6-09 + 4- 00 = 10-09 बजे तक है। अतः मिथुन का द्विस्वभाव लग्न जो प्रातः 9-46 से दोपहर 12-00 बजे तक तथा अभिजित का समय दोपहर 12-02 से दोपहर 12-52 तक ‌है , में भी घट् स्थापना कर सकते हैं।‌ नवरात्रा में चौघड़िया का विचार घट्स्थापना में शास्त्र सम्मत् नहीं है। इस प्रकार स्थानीय सूर्योदय के अनुसार अलग-अलग स्थानों का‌ समय गणित के अनुसार अलग-अलग होगा। ज्योतिर्विद् : घनश्यामलाल स्वर्णकार संस्थापक ,प्रबंध निदेशक एवं एवं सचिव श्री रामानुज ...

सोमवती अमावस्या को कैसे करें पूजन एवं दान ?

Image
  सोमवार युक्त अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं | गणित की प्रायिकता सिद्धांत के अनुसार वर्ष में एक या दो बार ही सोमवार के दिन अमावस्या हो सकती है | कभी-कभी किसी वर्ष में 3 भी हो जाया करती है | परंतु समय चक्र के अनुसार अमावस्या को सोमवार के दिन होना बिल्कुल अनिश्चित है | स्कंद पुराण के अनुसार सोमवार और अमावस्या का योग कभी-कभी होता है | विशेषकर सोमेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से कोटि यज्ञों के फल के बराबर बताया गया है | सोमवती अमावस्या को तीर्थ-स्नान, जप, पाठ एवं ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, दक्षिणादि सहित दान करना विशेष पुण्यप्रद माना गया है | पुनश्च इस बार 12 अप्रैल 2021 को हरिद्वार कुंभ का भी विशेष उत्सव एवं अवसर है | कुंभ के दौरान सोमवती अमावस्या का दिन बहुत ही पवित्र माना गया है | इस दिन नागा साधुओं द्वारा शाही स्नान किया जाता है, सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का एक विशेष महत्व भी है | सोमवती अमावस्या के दिन महिलाएं तुलसी माता की 108 परिक्रमा लगाते हुए कोई भी वस्तु का दान करने का संकल्प भी लेती है | सोमवती अमावस्या के योग में चंद्रमा, अश्विनी, कृत...